1990 में जब कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार हुआ, उस समय किसकी सरकार थी?

The kashmir files



इस समय पूरे देश भर में "The kashmir files" फ़िल्म बेहद चर्चा का विषय बनी हुई है हर कोई इसे देखने की अपील कर रहा है क्योंकि इस फ़िल्म में 19090 के दशक की उस घटना को हकीकत रूप में दिखाया गया जिसमें कैसे लाखों कश्मीरी पंडितों को घर से बेदखल कश्मीर छोड़ने को मजबूर किया और उनके साथ मारपीट, हिन्दू माता बहनों के साथ रेप व उन्हें छोटी सी बात पर म्रत्यु के घांट उतार दिया जाता था। आज आज भी ऐसे लाखों कश्मीरी हिन्दू अपनी जिंदगी टेंटों के घर में गुजार रहे है और हर पल ये सपना देख रहे है कब वह अपने घर कश्मीर बापिस लौटेंगे।


वही ये फ़िल्म बॉलीवुड के मुंह पर तमाचा भी है क्योंकि इस फ़िल्म देश भर में मेहज 600 से भी कम स्क्रीन मिली है लेकिन फिर भी इसने प्रभास जैसे मशहूर एक्टर की राधे श्याम मूवी को कड़ी टक्कर दे रही है वही इसी बीच कपिल शर्मा का भी देश मे जमकर बहिष्कार किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने इस फ़िल्म का प्रोमोशन अपने शो में कराने से मना कर दिया था चूंकि फ़िल्म हिंदू की भावनाओ से जुड़ी है और कपिल शर्मा खुद एक हिन्दू है या कहे उनका शो हिंदू द्वारा देखे जाने पर ही इतना पॉपुलर हो सका है। लेकिन आप जनता ने उन्हें उनकी जगह दिखाने का मन बना लिया है।


1990 में किसकी सरकार थी

बैसे तो फ़िल्म बहुत ही अच्छी है और सिनेमा घर मे इसे देखने वालों की लंबी कतारें लगी हुई है लोगों को टिकट मिल पाना भी मुश्किल हो रहा है फ़िल्म बिल्कुल सच्ची घटना ओर आधारित है जिसमें अनुपम खेर व मितुन चक्रवर्ती जैसे महान कलाकार शामिल है चूंकि फ़िल्म में जिहादी मानसिकता को भी दिखाया गया है इसलिए लोग एक दूसरे से ये मूवी देखने की अपील कर रहे है जिस बजह से मूवी बिना किसी प्रोमोशन के लगातार गूगल व सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नम्बर 1 पर ट्रेंड कर रही है।


फ़िल्म में कश्मीरी पंडितो और हिंदुआ पर हो रहे अत्याचार को देख फ़िल्म देखने वालों की आंखों के आंसू थम नहीं रहे है इसी बीच सोशल मीडिया पर एक सवाल जमकर कर पूछा जा रहा है और हर कोई इसका सही जवाब जानने को उत्सुक है आखिर "1990 में किसकी सरकार थी" तो आइए जानते है इस समय देश मे किस पार्टी की सरकार थी जो कश्मीरी पंडितों व हिंदुआ पर हो रहे अत्याचारों को नहीं रोक सकी।


The kashmir files


 इस पार्टी की सरकार थी 1990

जब कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार शुरू हुए, तो यह पहले से ही सुनियोजित था क्योंकि  भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री वीपी सिंह थे और गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद थे, जो एक कश्मीरी मुस्लिम थे जो अलगाववादी विचारधारा के कट्टर समर्थक थे। जिन्होंने बाद में आरक्षण के मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस ले लिया, फिर समाजवादी जनता पार्टी के नेता चंद्रशेखर जी द्वारा कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई, जो केवल 4-5 महीने तक चली, जो तत्कालीन कांग्रेस नेता थे।  और फिर कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लिए जासूसी के मुद्दे पर अपना समर्थन वापस ले लिया।

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