Guru purnima speech in hindi 2022 | गुरु पूर्णिमा स्पीच इन हिंदी 2022

Guru purnima speech in hindi 2022 | गुरु पूर्णिमा स्पीच इन हिंदी 2022


Guru purnima speech in hindi 2022


Guru purnima speech in hindi 2022 : सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर के समान दर्जा दिया गया है। क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में मार्गदर्शन और ज्ञान बढ़ाने के लिए गुरु की स्थिति अत्यंत आवश्यकता होती है। आप और हम देवताओं के समय से ही गुरु और उनके सफल शिष्यों की महिमा के कई किस्से सुनते रहे हैं, इन किस्सों से हमारे ह्रदय और समाज में गुरु का स्थान और भी अधिक प्रतिष्ठित हो जाता है। सनातन धर्म में गुरुपूर्णिमा का विशेष पर्व गुरु के सम्मान हेतु प्रतिवर्ष मनाया जाता है।  यह त्योहार हम अपने गुरुओं की महिमा का गुणगान करते और उनके द्वारा हमे दिए गए मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देते है।  गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अधिकांश भारतीय धार्मिक स्थानों जैसे मंदिर स्कूल इत्यादि में कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं आयोजन के अवसर सभी लोगों को अपने गुरु के प्रति और उनके द्वारा दी गई शिक्षा के गुणगान किया जाता है।  लेकिन अपने गुरु के बारे में बोलना हो या किसी महा पुरूष के बारे में बोलना भी एक कला होती है यदि आप भी इस कला में महारत प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपकी भाषा शैली और उच्चारण सही वह साफ-सुथरा होना बेहद जरूरी है। अगर आप भी बोल कर अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करना चाहते है और एक मधुर से भाषण की तलाश में हैं, तो इस लेख में आपके लिए बहुत अच्छी Guru purnima speech in hindi 2022 लेकर आए है।

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Guru purnima speech in hindi 2022


करता करे न कर सके
गुरु करे सब हुए
साथ द्वीप नो खंड में
गुरु से बड़ा न कोए

Guru purnima speech 500 shabd - आदरणीय गुरुदेव, प्रधानाचार्य जी वह समस्त शिक्षकों को गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनाएँ! आज के दिन हम सभी लोग यहां गुरुपूर्णिमा मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, इस दौरान आज मुझे भी अपने गुरु के प्रति अपने विचार रखने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है जिसके लिए में ईश्वर का तह दिल से धन्यवाद करता हूँ। हर वर्ष हिंदू कैलेंडर के हिसाब से गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए गुरु पूर्णिमा आषाढ़ महीने में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मनाते है।  प्राचीन और पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन विद्यार्थी या शिष्य अपने गुरु की पूजा करते और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। सनातन धर्म में गुरुपूजा का चलन इसलिए भी है क्योंकि सनातन धर्म की संस्कृति में गुरु भगवान समान या उससे भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। क्योंकि जब शिष्य पर गुरु की कृपा होती है और वह गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को अर्जित करता है तो वह जीवन मे आने वाले हर संकट का सामना करते हुए भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। गुरु के बिना ज्ञान प्राप्ति की कल्पना करना अंधरे में तीर मारने जैसा है इसलिए जीवन में गुरु की उपस्थिति बेहद ही महत्वपूर्ण है, इस दुनिया में हर सफल व्यक्ति के पीछे कोई न कोई गुरु जरूर होता है। जिससे वह सीखता है और उस सीखे हुए ज्ञान के आधार पर जीवन पद पर आगे बढ़ता है सफलता की बुलंदियों को हाँसिल करता है। इसलिए हर व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है।  

जैसा कि व्यक्ति के जीवन का सबसे पहला गुरु माँ को माना गया है क्योंकि आपके जन्म के बाद जो कुछ भी आप सीखते है वह ज्ञान आपकी माता द्वारा ही दिया जाता है। इसके बाद जैसे ही आप विद्यालय में प्रवेश लेते है तो आपको शिक्षक के रूप में एक नया गुरु मिलता है जो आपको संसार और पुस्तकों में बंद ज्ञान से आपको अबगत कराता है। इतना ही नहीं एल शिक्षक आपको वह सब ज्ञान देने का प्रयास करता है जिससे आप अपने जीवन में हर समस्या से लड़ सकें और सफलताओं को प्राप्त कर सकें। शिक्षक ही आपको जीवन के सही रास्ते पर पर चलने की शिक्षा देता है, जिससे आप अपने परिवार और पूरे देश का नाम दुनिया में रोशन कर सकें। इसलिए जब भी कोई व्यक्ति या प्राणी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है तो उस सफलता में गुरु की भूमिका छुपी होती है। 

गुरुपूर्णिमा के उत्सव के पीछे मिथक यह है कि महर्षि वेद व्यास इस पृथ्वी पर सभी मानव जाति के गुरु माने जाते हैं, इसलिए इस दिन गुरुपूर्णिमा के अवसर पर लोग महर्षि वेद व्यास जी की छवि की पूजा और याद किया करते हैं। हिन्दू धर्म के ग्रंथों अनुसार आज से  3,000 साल पहले महर्षि वेद व्यास जी ने जन्म लिया था, उनके द्वारा रचित ग्रंथों को अत्यंत उपयोगी पाया, जिन्होंने मानव जीवन का उद्धार किया इसलिए इन ग्रंथों का अध्ययन आज भी समस्त मानव जाति कर रही है। इतना ही नहीं विदेशों में भी वेद व्यास जी द्वारा ग्रंथो को पढ़ा जाता है और लोग वहां भी गुरू पूर्णिमा को मानते है और इस अवसर पर पूजा अर्चना भी करतें है। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध ने इसी दिन सारनाथ में अपना पहला उपदेश पेश किया था। इसी दिन योग परंपरा के अनुसार भगवान शिव ने सात ऋषियों को योग का ज्ञान भी दिया था. हिन्दू शास्त्रों और वेदों में गुरु को देवताओं से ऊपर भी पूजनीय माना गया है, इसलिए भारत वर्ष सहित विदेशों में भी गुरु को याद करते हुए शिष्य गुरुपूर्णिमा मनाते है। यह त्यौहार भारत ही नहीं नेपाल और भूटान इत्यादि देशों में भी बड़ी प्रसन्नता के साथ विभिन्न धर्मों के अनुयायियों द्वारा जैसे हिंदू, जैन और बौद्धों द्वारा अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के हिसाब से मनाते है और अपने गुरु की पूजा अर्चना करते है।  प्राचीन काल से, गुरुपूर्णिमा के अवसर पर, लोग अपने ब्रह्मकाल गुरु और संतों के चरणों में प्रार्थना करते हैं।  यदि कोई शिष्य समय पर अपने जीवन में गुरु के महत्व को पहचान लेता है, तो उसे अपने उज्ज्वल भविष्य की किरणें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, लेकिन यदि वह इस काम में देरी करता है और समय उसके हाथ से निकल जाता है, तो उसके हाथ में पश्चाताप के अलावा कुछ भी नहीं रहता है।  इसलिए, गुरु में अपने शिष्य के जीवन के तरीके को बदलने की क्षमता होती है।  इसलिए उसी गुरु के सम्मान में इस विशेष दिन को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।  इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।


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